मेरी भीतर की यात्रा भाग -१

मेरी भीतर की यात्रा भाग -१

कही दिनों से मै सोच रहा था की मै अपने experience शेयर करूँ , वेबसाईट भी मेरे पास बहोत सारी थी , मगर हर बार न जाने मै क्यूँ टाल देता था । क्यूंकी मुझे पता है की मै एक अच्छा लेखक नहीं हूँ ।और मुझे अपना मत किसी को बताने में संकोच होता है । क्यूंकी ये अच्छी बात नहीं है , पता नहीं अगला सुनने के मूड में हो ना हो । और उसे मेरी बातों मे कितना इन्टरेस्ट हो । मगर बाद मे ख्याल आया सीधे सीधे ना कसही चलो एक ब्लॉग मे ही लिखते है , जिसको पढ़ना होगा वो अपने आप पढ़ भी लेगा और दुसरो को भी कोई असर नहीं होगा , और मेरे मन मे जो दबा रहा है वो किसी प्रकार बाहर निकले तो मुझे भी राहत मिल जायेगी । वैसे तो हर दिन देश मे कुछ न कुछ तो होता ही रहता है , और ऐसी हालत मे अपना मानसिक स्वास्थ ठीक रखना एक बड़ी बात बन जाती है । मुझे यह पता चलने लगा था की यह एक बड़ी चीज है , जिसपर ध्यान देना चाहिए तब जाकर मै कुछ शांत हो सकूँ , यह मेरे m. tech के दिनोंकी बात है , मैने gate नाम के exam crack करके  m. tech को अड्मिशन लिया था , कोल्हापूर के शिवाजी विद्यापीठ में , मै बहोत खुश था , मुझे पापा ने admission प्रोसेस पूरी करके हॉस्टल मे जगह देकर वो अहमदनगर , हमारे घर को निकल पड़े । वहा पर मेरा मन बोर होने लगा , मै चाहता था की हॉस्टल की जगह मै २-४ फ़्रेंड्स के साथ एक फ्लैट रेंट पर लेकर रहूँ ।   

मुझे थोड़े की दिन मे मेरे ही क्लास का एक लड़का मिला। तो वो भी यही विचार का था , मगर हमें ढंग की रूम नहीं मिल रही थी , हा मगर एक छोटा सा हॉस्टल था , जहां पर ३-४ रूम ही थी , सोचा  पढ़ाई के लिए  ये अच्छी  जगह होगी । तो मैने उसे हा कहकर वहाँ पे रहने लगा । मगर मुझे पता नहीं था की वह लड़का बदचलन का था , उसके शौक और लक्षण कुछ ठीक नहीं लगते थे । पर  शुरुआत मे मैने उसपर ध्यान नहीं दिया । 

फिर कुछ दिनों बाद हमे  एक जगह मिली जहा  सिर्फ २ ही रूम्स थे , यहा पर  वो सब दूसरे बच्चे पढ़ाई कम करते थे और  शोर बहोत ज्यादा ।  तो मैने भी हा करदी हम फिर उस नए रूम पर रहने के मिए चले गये । 

Leave a Reply